सुन्नी और वहाबी की पहचान 

Bismillah

ऐ ईमान  वालो यकिन  जान लो की हर फ़र्ज़ से बड़ा और एहम फ़र्ज़ ईमान की हिफाज़त है।

और िमाक़न मेहबूब ऐ खुदा  नबी ऐ करीम (सल्लाहो तआला  अलैहि सल्लम)  की गुलामी और मोहब्बत की नाम है।

(हदीस शरीफ )

हजरत अनस रज़िअल्लाहु तआला अन्हो से नरिवयत है की रसूलल्लाह (सल्लाहो तआला  अलैहि सल्लम) ने फ़रमाया की कोई शक्श उस वक़्त तक मोमिन नही हो सकता जब तक की में  उस के माँ बाप बेटे और तमाम लोगो से ज्यादा मेहबूब न हो जाँऊ   ।।

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